शुक्रवार, 12 मई 2023
बेलगाम ई रिक्शाओं का देश भर में आतंक
पर्यावरण को बचाने की दृष्टि से दुनिया भर में वैकल्पिक ईंधन के कई स्रोतों में से एक है इलेक्ट्रॉनिक वाहन। आजकल इन ई-वाहनों की संख्या काफ़ी बढ़ रही है और कई नामी कम्पनियाँ भी इस दौड़ में आ चुकी हैं। इसी श्रृंखला में देश भर में ई-रिक्शाओं का चलन भी काफ़ी तेज़ी से हो रहा है। जहां एक ओर ये ई-रिक्शा पर्यावरण को बचाने का काम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर इनका आतंक भी काफ़ी बढ़ रहा है। देश भर के कई शहरों में अवैध रूप से चलने वाले ई-रिक्शा यातायात व्यवस्था के लिए एक अभिशाप बने हुए हैं।
आज आप देश के किसी भी शहर में चले जाएँ वहाँ आपको बेलगाम दौड़ रही ई-रिक्शा के चलते अव्यवस्था के साथ ट्रैफ़िक जाम जैसी बड़ी परेशानी को झेलना पड़ता है। इसके मुख्य कारणों में से कुछ कारण ऐसे हैं जो किसी भी शहर में आप देख सकते हैं। अपने हिसाब से रूट बनाकर दौड़ रहे ये ई-रिक्शा चालक शहर की गलियों तक में जाम को बड़ा रूप दे देते है। इसके अलावा बाजारों में मनमाने ढंग से रिक्शाओं को रोककर खड़े रहना। एक ही रूट पर अधिक यात्रियों के लालच में काफ़ी देर तक सड़कों पर खड़े रहना और जाम लगाना। ग़लत लेन में रिक्शाओं को चला कर अन्य वाहनों को न निकलने देना। ये कुछ ऐसे कारण हैं जो शहरों में जाम की बड़ी परेशानी की वजह बनी हुई हैं।
ई-रिक्शाओं पर यातायात पुलिस की लगाम भी ढीली है, जिस कारण अवैध ई-रिक्शाओं की दौड़ भी बढ़ती जा रही है। यदि किसी शहर में यदि एक हज़ार ई-रिक्शाओं का पंजीकरण निर्धारित किया जाता है तो आपको सड़कों पर उससे कई गुना ज़्यादा तादाद में ई-रिक्शाओं का जाल नज़र आ जाएगा। परंतु ट्रैफिक विभाग या नगर निगम के अधिकारियों को ये अवैध ई-रिक्शा नज़र नहीं आएँगे। यदि कभी इन पर सख़्ती की भी जाती है तो वह केवल औपचारिकता के सिवाय कुछ नहीं होती।
दिल्ली जैसे महानगर को ही लें तो यहाँ की किसी भी प्रमुख सड़क पर, जहां ई-रिक्शाओं को चलाए जाने की अनुमति दी गई है, आपको जाम के नज़ारे दिखाई देंगे। मेट्रो स्टेशन हो या कोई भी प्रमुख बाज़ार, ई-रिक्शाओं का आतंक किसी माफिया से कम नहीं है। दिल्ली की मुख्य मेन रोड पर प्रायः ये ई-रिक्शा वाले दो से तीन लेन को ब्लॉक कर देते हैं और मजबूरन बसों व अन्य भारी वाहनों को भी अपनी निर्धारित लेन बदल कर सड़क के बीचों बीच चलना पड़ता है। नतीजतन जाम की स्थित बन जाती है। इस जाम के चलते प्रदूषण भी बढ़ जाता है। फिर वो चाहे अन्य वाहनों से निकालने वाले धुएँ के कारण वायु प्रदूषण हो या ध्वनि प्रदूषण, दोनों ही तकलीफ़ देते हैं। तो जिस पर्यावरण को बचाने की मंशा से ई-रिक्शाओं का चलन शुरू हुआ था वो उद्देश्य तो पूरा होता नहीं दिखाई देता।
ज़्यादातर ई-रिक्शा आपको मेट्रो स्टेशन व बस स्टॉप पर दिखाई देंगे। सवारियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए ई-रिक्शाओं व ऑटो सहायक पाए जाते हैं। परंतु यदि ये ई-रिक्शा व ऑटो अगर अनियंत्रित रूप से चलने लगेंगे और अपनी मनमानी करेंगे तो जनता को फ़ायदा नहीं नुक़सान ही होगा। प्रायः यह देखा गया है कि ज़्यादातर ई-रिक्शा सवारियों की खोज में बस स्टॉप को घेर कर खड़े रहते हैं। इस कारण बसों को उनके निर्धारित स्टॉप पर रुकने की जगह नहीं मिलती है। यदि किसी बस में से उस स्टॉप पर कोई उतरने वाली सवारी नहीं होती तो बस चालक अपनी बस को उस स्टॉप पर नहीं रोकता। परंतु उस बस स्टॉप से यदि कोई चढ़ने वाली सवारी होती है और यदि वो बस स्टॉप के अंदर प्रतीक्षा कर रही हो तो वो ई-रिक्शाओं के खड़े होने के कारण बस ड्राइवर को दिखाई नहीं देती। इसलिए जहां-जहां ये ई-रिक्शा बस स्टॉप को अवैध रूप से घेर कर खड़े रहते हैं वहाँ-वहाँ सवारियों को मजबूरन सड़क पर खड़ा होना पड़ता है। ऐसे में दुर्घटना और छीना-झपटी होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है। परंतु कोई भी अधिकारी, चाहे पुलिस विभाग का हो या नगर निगम का, कोई कार्यवाही नहीं करता। कारण स्पष्ट है, ई-रिक्शाओं का जाल चलाने वाले गैंग हर विभाग के अधिकारियों को ‘खुश’ रखते हैं।
देश भर में जिन-जिन शहरों ऐसे मार्ग या प्रमुख सड़कें हैं, जहां ये ई-रिक्शा जाम का कारण बनते हैं, वहाँ पुलिस प्रशासन व नगर निगम को सख़्ती से पेश आना चाहिए। यदि वहाँ पर अवैध रूप से ई-रिक्शा चल रहे हैं तो इनको ज़ब्त किया जाना चाहिए। यदि कोई भी ई-रिक्शा चालक ग़लत लेन में खड़ा है तो उसका चालान काटना चाहिए। ऐसा यदि समय-समय पर होता रहे तो ई-रिक्शा व ऑटो चलाने वाले गलती करने से बचेंगे। यदि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा चालान में चला जाएगा तो कौन ऐसी गलती दोबारा करेगा। जहां पर अधिक ई-रिक्शा खड़े नहीं हो सकते वहाँ पर किसी ख़ाली सड़क पर या मैदान में ई-रिक्शा का स्टैंड बनाया जाए जहां चार्जिंग के साथ-साथ अन्य सुविधाएँ भी हों। जैसे ही ई-रिक्शा की माँग हो वैसे ही उन्हें सड़क पर, मेट्रो स्टेशन या बस स्टॉप पर आने दिया जाए।
ऐसा नहीं है कि पुलिस अधिकारी यातायात को नियंत्रित नहीं कर सकते। यदि किसी भी इलाक़े में किसी वीआईपी का जाना तय होता है तो वहाँ पर यातायात पूरी तरह से व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है। यह वही मार्ग होते हैं जहां सामान्य दिनों में आपको भारी जाम का सामना करना पड़ता है। परंतु यदि कोई वीआईपी उस मार्ग से गुज़र रहा हो तो कुछ पल के लिए ही सही वह सड़क भी साँस लेने लगती है और उस पर चलने वाले वाहन भी चैन की साँस लेते हैं। इसलिए समय-समय पर यातायात पुलिस और नगर निगम विभाग के अधिकारियों की संयुक्त कार्यवाही होती रहनी चाहिए जिससे कि देश की जनता को भी ये लगे कि वो भी किसी वीआईपी से कम नहीं और उन्हें भी ई-रिक्शा व अन्य अवैध वाहनों के चलते जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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