शुक्रवार, 5 मई 2023

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुख्यमंत्री योगी का शंखनाद


बीते हफ़्ते देश भर में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) खूब चर्चा में थी। कारण था यूपी एसटीएफ़ द्वारा एक प्रभावशाली व्यक्ति को गिरफ़्तार किया जाना। सत्ता के गलियारों में, ख़ासकर दिल्ली में, किसी ने भी इस बात की कल्पना नहीं की होगी कि एक ऐसा व्यक्ति जो ख़ुद को देश के शीर्ष नेतृत्व के काफ़ी निकट बताता रहा हो उसे एक मामूली ठग की तरह ऊप्र की पुलिस गिरफ़्तार कर लेगी। इस गिरफ़्तारी से एक सीधा संदेश गया है, योगी राज में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है।  
 
संजय राय नामक ये व्यक्ति पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के शेरपुर गांव का रहने वाला है। दिल्ली के गलियारों में ये संजय शेरपुरिया के नाम से मशहूर है। ख़ुद को सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेताओं का करीबी बताने वाला शेरपुरिया, किसी भी काम को चुटकियों में करवाने का दावा करता था। लोगों को विश्वास दिलाने की नीयत से शेरपुरिया ने हर महत्वपूर्ण व्यक्ति के साथ अपनी तमाम तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी डाल रखी थी। जिस विश्वास के साथ वो अपने ‘शिकारों’ के साथ अपने दिल्ली स्थित आवास में मीटिंग करता था, उससे तो कोई भी उसके झाँसे में बड़े आराम से आ जाता। क्योंकि उसका आवास प्रधान मंत्री के आवास के बेहद नज़दीक था। इतना ही नहीं उसके घर पर चलने वाले इंटरनेट के वाईफ़ाई का नाम भी ‘पीएमओ’ था। जिसका बखान वो अपने मेहमानों के सामने बड़े ज़ोर शोर से करता था।  
 

एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार शेरपुरिया की संस्था में देश के कई बड़े आईएएस, आईपीएस अधिकारी व फ़ौज के कुछ अफ़सर भी हैं। ये सभी व्यक्ति अपनी सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद इस संस्था के सलाहकार बने हुए थे। आश्चर्य की बात यह है कि कोई व्यक्ति इतने बड़े पैमाने पर ठगी कर रहा था और देश की राजधानी में शीर्ष जाँच एजेंसियाँ और ख़ुफ़िया तंत्र इन सबसे बेख़बर था। इसकी जानकारी जैसे ही ऊप्र की एसटीएफ़ को लगी तो उन्होंने तुरंत कार्यवाही की। इस कार्यवाही के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ बधाई के पात्र हैं जिन्होंने बिना विलंब इस ठग पर कार्यवाही करवाई। 
 
दरअसल मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने इससे पहले भी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाया है। आपको याद होगा कि आज से एक साल पहले मुख्य मंत्री ने उत्तर प्रदेश के सभी अफ़सर, मंत्री व विधायकों को तीन महीने के अंदर अपनी चल-अचल सभी सम्पत्तियों की घोषणा सार्वजनिक करने के आदेश दिए थे। उनके इस आदेश से काफ़ी हड़कंप मच गया था। भ्रष्टाचार के विरुद्ध जब भी कोई नेता आवाज़ उठाता है तो उसकी लोकप्रियता ऊपर उठने लगती है। जानता के बीच भी एक सकारात्मक संदेश जाता है। जिस तरह योगी आदित्यनाथ अपनी ‘बुलडोज़र’ नीति के लिए जाने जाते हैं, उनके इस कदम से तमाम भ्रष्ट लोगों का भयभीत होना निश्चित ही है। इसीलिए शेरपुरिया जैसे व्यक्ति पर कार्यवाही होना योगी आदित्यनाथ के व्यक्तित्व को और मज़बूती देगा। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भी योगी जी को प्रोत्साहित करना चाहिए।
 
परंतु योगी जी को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि उनके इर्द गिर्द की नौकरशाही ही उनके इस शंखनाद  का पलीता न लगा दें। दिल्ली के कालचक्र समाचार ब्यूरो ने उत्तर प्रदेश सरकार के एक वीआईपी पाइलट कैप्टन प्रज्ञेश मिश्रा के भारी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। इस पाइलट के परिवार की 200 से ज़्यादा ‘शैल कम्पनियों’ में हज़ारों करोड़ रुपया घूम रहा है। जिसे कालचक्र ने सप्रमाण उजागर किया था। कालचक्र की शिकायत पर ही प्रवर्तन निदेशालय ने प्रज्ञेश मिश्रा के ख़िलाफ़ जाँच करने का नोटिस उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को 19 मई 2020 को जारी किया था। आश्चर्य है कि तब से अब तक इसकी जाँच नहीं हुई। 
 
कालचक्र ने उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को भी इसकी जाँच न होने की लिखित शिकायत अप्रैल 2021 में भेजी। राज्यपाल महोदया ने तुरंत 31 मई 2021 को उत्तर प्रदेश शासन को इस जाँच को करने के निदेश दिए। पर उस जाँच का क्या हुआ, आज तक नहीं पता चला।  
 
कैप्टन प्रज्ञेश मिश्रा व उनके परिवार की ‘शैल कम्पनियों’ की कई सूचियाँ भी योगी जी के कार्यालय को भेजीं परंतु जाँच में कोई प्रगति नहीं हुई। उधर उत्तर प्रदेश शासन ने अपनी तरफ़ से आश्वस्त होने के लिए या शिकायतकर्ता का नैतिक बल परखने के लिए, उनसे शपथ पत्र भी लिया कि वे अपनी शिकायत पर क़ायम हैं और पूरी ज़िम्मेदारी से ये मामला जनहित में उठा रहे हैं। इसके बाद भी जाँच क्यों नहीं हुई ये चिंता का विषय है। अगर शेरपुरिया की तरह इन कम्पनियों में घूम रहे हज़ारों करोड़ रुपए का स्रोत कैप्टन प्रज्ञेश मिश्र या उनके परिवारजनों से कड़ाई से पूछा गया होता तो अब तक प्रदेश के कितने ही बड़े अफ़सर और नेता बेनक़ाब हो चुके होते। इसीलिए शायद उन्होंने इस जाँच को आज तक आगे नहीं बढ़ने दिया और योगी जी को लगातार धोखे में रखा। 
 
अब योगी जी को इस जाँच का बुलडोज़र भी शेरपुरिया की तर्ज़ पर तेज़ी से चलाना चाहिए। इस से उनकी छवि तो बनेगी ही, भ्रष्टाचार के विरुद्ध उनके इस शंखनाद की ईमानदारी भी सिद्ध होगी। क्योंकि किसी मुख्यमंत्री के एक साधारण से पाइलट को कुछ लाख रुपए का ही वेतन मिलता है। उस पर इतनी अकूत दौलत कहाँ से आ गयी, ये योगी जी के लिए गहरी चिंता का कारण होना चाहिए। वहीं गुजरात की बात करें तो ऐसे ही एक पायलट अजय चौहान को हाल ही में गुजरात सरकार ने नौकरी से हटाया और उसके ख़िलाफ़ जाँच के आदेश भी दिये। वहीं कैप्टन प्रज्ञेश मिश्रा के विरुद्ध ईमानदारी से जाँच का मतलब उत्तर प्रदेश शासन में बीस वर्षों से व्याप्त भारी भ्रष्टाचार के क़िले का ढहना होगा। अब देखना यह है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ हिम्मत से छेड़ी इस मुहीम को योगी जी कितनी तेज़ी से आगे बढ़ाते हैं?

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